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latestagri.com > Indian News (भारतीय समाचार) > Pakistan may lose GI tag for basmati rice from EU. (पाकिस्तान को EU से बासमती चावल का जीआई टैग मिलना मुश्किल!)
Indian News (भारतीय समाचार)

Pakistan may lose GI tag for basmati rice from EU. (पाकिस्तान को EU से बासमती चावल का जीआई टैग मिलना मुश्किल!)

Latest Agri
Last updated: September 26, 2024 12:35 am
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Contents
Main Points In Hindi (मुख्य बातें – हिंदी में)Main Points In English(मुख्य बातें – अंग्रेज़ी में)Complete News In Hindi(पूरी खबर – हिंदी में)Complete News In English(पूरी खबर – अंग्रेज़ी में)

Main Points In Hindi (मुख्य बातें – हिंदी में)

  1. ईसी का निर्णय: यूरोपीय आयोग (ईसी) ने पाकिस्तान के बासमती चावल के लिए संरक्षित भौगोलिक संकेत (पीजीआई) टैग देने के आवेदन को इटली के विरोध के कारण अस्वीकार कर दिया है।

  2. इतालवी समर्थन: इटली द्वारा उठाए गए विरोध को अपने अन्य सदस्य देशों, जैसे बुल्गारिया, रोमानिया, स्पेन और ग्रीस का समर्थन मिला, जिससे ईसी का निर्णय और भी मजबूत हुआ।

  3. आवेदन की प्रक्रिया: पाकिस्तान ने अपना आवेदन फरवरी 2023 में दायर किया था, लेकिन इटली की आपत्तियों के चलते यह आवेदन अब तक स्वीकार नहीं हुआ।

  4. संशय और चिंताएं: इटालियन कृषि संघों ने पाकिस्तान के चावल उत्पादन में बाल श्रम और अवैध कीटनाशकों जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है, और यह भी तर्क किया कि इस पीजीआई टैग से इतालवी चावल उद्योग को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

  5. भारत का परिदृश्य: भारत ने पहले ही अपने बासमती चावल के लिए पीजीआई टैग के लिए आवेदन किया है, और इस प्रक्रिया के बीच पाकिस्तान की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।

Main Points In English(मुख्य बातें – अंग्रेज़ी में)

Here are the main points from the article regarding the European Commission’s decision on Pakistan’s basmati rice GI tag:

  1. Rejection of Pakistan’s Application: The European Commission (EC) has decided not to grant a Protected Geographical Indication (PGI) tag to basmati rice from Pakistan, following opposition from Italy and support from several other EU member states.

  2. Concerns Raised by Italy: Italian agricultural groups, including Coldiretti and Filiera Italia, objected to the PGI designation, citing risks such as child labor, illegal pesticides, and potential economic harm to the European rice industry. They argued that granting PGI status would allow Pakistani rice to compete unfairly.

  3. Economic Impact Considerations: There were worries that the recognition of Pakistani basmati rice would drive down European rice prices and impact local production, particularly in Italy, which has seen a decline in the cultivation of certain rice varieties.

  4. Pakistan’s Export Performance: During the 2023-24 period, Pakistan exported significantly less basmati rice (0.74 million tons) compared to India (5.2 million tons), emphasizing the competitive landscape in the European Union market.

  5. Broader Implications for Bilateral Relations: The ongoing discussions between the EU and India regarding geographical indications indicate a complex landscape for agricultural products, with both countries working to protect their respective markets.


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Complete News In Hindi(पूरी खबर – हिंदी में)

यूरोपीय आयोग का निर्णय: पाकिस्तानी बासमती चावल के लिए PGI टैग नकारना

इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान द्वारा प्रस्तुत आवेदन के कारण, यूरोपीय आयोग (ईसी) ने पाकिस्तान के बासमती चावल के लिए संरक्षित भौगोलिक संकेत (पीजीआई) टैग देने की संभावना को खारिज कर दिया। यह निर्णय इटली के विरोध को स्वीकार करने के बाद लिया गया, जिसमें बुल्गारिया, रोमानिया, स्पेन और ग्रीस भी शामिल हुए। ईसी ने 23 सितंबर को यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसका मुख्य कारण इटालियन कृषि उद्योग के हितों की सुरक्षा था।

इटली का विरोध और उसके कारण

इटली के कृषि, खाद्य संप्रभुता और वानिकी मंत्री फ्रांसेस्को लोलोब्रिगिडा ने घोषणा की कि यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान के आवेदन पर इटली के विरोध को स्वीकार कर लिया। इटली ने यह तर्क दिया कि पाकिस्तानी बासमती चावल में कई समस्याएँ हैं, जैसे बाल श्रम, अवैध कीटनाशक और दोषपूर्ण व्यापार प्रक्रिया। इटली के कृषि उद्यमी संघ कोल्डिरेटी और फिलिएरा इटालिया ने ईसी में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह "मेड इन इटली प्रोडक्शन्स की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम" है।

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इटली के कृषि संघों का मानना है कि अगर पाकिस्तान के बासमती चावल को पीजीआई टैग दिया गया, तो इससे यूरोपीय चावल उद्योग को खतरा होगा। उनके अनुसार, इस स्थिति से इटली में चावल की खेती को कम मूल्यवान किस्मों की ओर ले जाने का खतरा हो सकता है, जिससे चावल की कीमतों में गिरावट आएगी।

पाकिस्तान का बासमती चावल का निर्यात

पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2023-2024 के दौरान लगभग 0.74 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया, जबकि भारत ने 5.2 मिलियन टन से अधिक निर्यात किया। एपीडा के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने यूरोपीय संघ को 2023-24 में 1.64 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया। पाकिस्तान ने अप्रैल-जून 2023 में 47,776 टन चावल निर्यात किया, जिसमें नीदरलैंड, जर्मनी और इटली जैसे प्रमुख आयातक थे।

सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताएँ

कोल्डिरेटी और फिलिएरा इटालिया ने पाकिस्तान की कृषि प्रथाओं में सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता की कमी पर भी चिंता जताई। इन संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन और बाल काम की समस्याएं गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके अलावा, जुलाई में जर्मनी में एक जैविक बासमती चावल की खेप में आनुवंशिक रूप से संशोधित चावल पाया गया, जिससे पाकिस्तान की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए।

रूढ़ियों का प्रतिकूल प्रभाव

इटली का मानना था कि भारतीय पारंपरिक बासमती की कीमतें पाकिस्तानी किस्मों की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत अधिक हैं। इसके अलावा, भारत ने अपने बासमती चावल के लिए जीआई टैग प्राप्त करने के लिए जुलाई 2018 में आवेदन किया था, जबकि पाकिस्तान ने 23 फरवरी 2023 को अपना आवेदन पेश किया था।

यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया और द्विपक्षीय वार्ता

यूरोपीय संघ ने 30 अप्रैल को पाकिस्तान के आवेदन का पुनर्प्रकाशन किया, जिससे ईयू द्वारा इस्लामाबाद के आवेदन की स्थिति को निर्धारित किया गया। वहीं, ईयू और भारत भी जीआई टैग प्रदान करने के लिए द्विपक्षीय वार्ताएं कर रहे हैं।

निष्कर्ष

इस घटनाक्रम का परिणाम यह है कि पाकिस्तान का बासमती चावल यूरोपीय संघ में संरक्षित भौगोलिक संकेत (पीजीआई) का टैग प्राप्त नहीं कर पाया। यह न केवल इटली के कृषि उद्योग की चिंताओं को दर्शाता है, बल्कि पाकिस्तान की कृषि उत्पादन प्रक्रिया में सामाजिक और पर्यावरणीय सतर्कता की कमी को भी उजागर करता है।

यह निर्णय पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि यह न केवल उनकी निर्यात संभावनाओं को प्रभावित करेगा बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग क्षमताओं को भी सीमित करेगा।


Complete News In English(पूरी खबर – अंग्रेज़ी में)

इस वर्ष की शुरुआत में पाकिस्तान द्वारा यूरोपीय संघ में बासमती चावल के लिए संरक्षित भौगोलिक संकेत (पीजीआई) टैग प्राप्त करने के लिए दायर आवेदन को यूरोपीय आयोग (ईसी) ने अस्वीकार कर दिया है। इटली के विरोध के कारण यह निर्णय लिया गया है, जिसमें अन्य देशों जैसे बुल्गारिया, रोमानिया, स्पेन और ग्रीस ने भी समर्थन किया। यूरोपीय संघ की कृषि समिति की पिछले सप्ताह बैठक के बाद ईसी ने यह निष्कर्ष निकाला। इटली के मंत्री फ्रांसेस्को लोलोब्रिगिडा ने इस घटना को “अच्छी खबर” बताया।

इतालवी कृषि उद्यमी संघ कोल्डिरेटी और फिलिएरा इटालिया ने पाकिस्तान के बासमती चावल को पीजीआई का दर्जा दिए जाने के खिलाफ अभियान चलाया था। ये संगठन यह मानते हैं कि पाकिस्तानी बासमती चावल में बाल श्रम और अवैध कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है और इससे यूरोपीय चावल उद्योग को खतरा हो सकता है। उनका तर्क था कि बासमती चावल को पीजीआई टैग मिलने से शुल्क में छूट मिल सकती है, जिससे इटली का चावल उद्योग जोखिम में पड़ सकता है।

पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 0.74 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया, जबकि भारत ने 5.2 मिलियन टन से अधिक का निर्यात किया। जबकि, अप्रैल-जून 2023 के दौरान पाकिस्तान ने 47,776 टन निर्यात किया है, जिसमें नीदरलैंड, जर्मनी और इटली शामिल हैं। कोल्डिरेटी और फिलिएरा इटालिया ने पाकिस्तान की सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता की कमी पर भी चिंता जताई है।

पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघन और बाल श्रम के आरोप हैं। जर्मनी में जैविक बासमती चावल में आनुवंशिक रूप से संशोधित चावल की मौजूदगी भी पाई गई थी। इन चिंताओं के कारण इटली और अन्य देशों ने पाकिस्तान के बासमती चावल के लिए पीजीआई दर्जा देने का विरोध किया।

भारत ने जुलाई 2018 में अपने बासमती चावल के लिए पीजीआई टैग के लिए आवेदन किया था, जबकि पाकिस्तान ने फरवरी 2023 में आवेदन किया। ईयू ने 30 अप्रैल को पाकिस्तान के आवेदन को फिर से प्रकाशित किया, लेकिन 23 फरवरी को इससे संबंधित प्रकाशन निरस्त कर दिया गया था। यूरोपीय संघ और भारत के बीच भी जीआई टैग के लिए द्विपक्षीय वार्ताएं चल रही हैं।

यह मामला न केवल कृषि और व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक भौगोलिक संकेतों के संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण स्थिरता पर भी प्रकाश डालता है। ईसी का निर्णय इटली को अपने चावल उद्योग की सुरक्षा में मदद करता है और यह दिखाता है कि भौगोलिक संकेतों के लिए राजनीतिक और आर्थिक दबाव कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।



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