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latestagri.com > Indian News (भारतीय समाचार) > India’s top reservoirs hold steady at 87% capacity. (भारत के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण स्थिर रहा!)
Indian News (भारतीय समाचार)

India’s top reservoirs hold steady at 87% capacity. (भारत के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण स्थिर रहा!)

Latest Agri
Last updated: September 26, 2024 8:20 pm
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Contents
Main Points In Hindi (मुख्य बातें – हिंदी में)Main Points In English(मुख्य बातें – अंग्रेज़ी में)Complete News In Hindi(पूरी खबर – हिंदी में)Complete News In English(पूरी खबर – अंग्रेज़ी में)जल सांख्यिकी का अवलोकनमानसून का प्रभावक्षेत्र विशेष का विश्लेषणभविष्य की संभावनाएँ

Main Points In Hindi (मुख्य बातें – हिंदी में)

  1. जल स्तर में गिरावट: भारत के 155 प्रमुख जल भण्डारों में इस सप्ताह जल स्तर में थोड़ी कमी आई है, जो वर्तमान भण्डारण क्षमता के 87 प्रतिशत पर है।

  2. क्षेत्रवार जल संग्रहण: दक्षिणी क्षेत्र में जल संग्रहण में 2 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में जल संग्रहण में वृद्धि देखी गई है।

  3. जलाशयों की स्थिति: 40 जलाशय भरे हुए हैं, जबकि 13 जलाशय 50 प्रतिशत से कम भरे हुए हैं। खासकर पंजाब और हिमाचल प्रदेश में जल संग्रहण सामान्य से कम है।

  4. मानसून की वापसी: दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के कारण जल संग्रहण में यह गिरावट आई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बारिश के आसार हैं, जो जल स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

  5. रबी फसल के लिए संकेत: आगामी रबी सीजन के लिए जलाशयों का स्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से अधिक है, जो दक्षिणी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों के लिए सुखद संकेत है।

Main Points In English(मुख्य बातें – अंग्रेज़ी में)

Here are the main points from the provided article:

  1. Current Water Levels: According to the Central Water Commission (CWC), water levels in India’s 155 major reservoirs have slightly decreased this week but remain at 87% of their total capacity, amounting to 156.639 BCM, compared to 157.159 BCM the previous week.

  2. Regional Variations: The southern region witnessed a 2% decline in water storage, whereas the western and eastern regions saw increases. Water storage levels in the central and northern regions remained unchanged.

  3. Monsoon Impact: The slight decrease in water storage is attributed to the retreat of the southwest monsoon, which has delivered 6% more rainfall overall, particularly in central (17% more) and southern India (16% more).

  4. Reservoir Conditions: While 40 reservoirs are currently full, 13 reservoirs are less than 50% full, representing a weekly increase. Notably, certain states like Punjab and Himachal Pradesh are experiencing lower than normal storage levels.

  5. Positive Outlook for Rabi Season: The current water storage levels, which are above the 10-year average, are seen as promising for the upcoming rabi season, especially for the southern, central, and western regions where reservoir capacities are relatively high.


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Complete News In Hindi(पूरी खबर – हिंदी में)

इस सप्ताह केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों के अनुसार, भारत के 155 प्रमुख जल भण्डारों में जल स्तर में हल्की गिरावट आई है, लेकिन यह वर्तमान भण्डार क्षमता का 87 प्रतिशत बना हुआ है। दक्षिणी क्षेत्र में जल संग्रहण में 2 प्रतिशत की कमी देखी गई है, जबकि पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में जल स्तर में वृद्धि हुई है। सीडब्ल्यूसी के साप्ताहिक बुलेटिन के मुताबिक, मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में जल संग्रहण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रमुख जलाशयों का जल स्तर 180.852 बीसीएम की क्षमता का 87 प्रतिशत यानी 156.639 बीसीएम है, जो पिछले सप्ताह के 157.159 बीसीएम से कम है।

इस गिरावट का मुख्य कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी है। वर्तमान में मानसून 6 प्रतिशत अधिक है, जिसमें मध्य भारत में 17 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 16 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि मानसून की वापसी ने उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में कुछ दिनों की वर्षा का अनुमान लगाया है, जिससे जल स्तर में कुछ सुधार होने की उम्मीद है।

विशिष्ट आंकड़ों की बात करें तो, पंजाब में जल स्तर सामान्य से 65 प्रतिशत कम है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह 22 प्रतिशत कम है। उत्तरी जलाशयों में जल स्तर पिछले सप्ताह के समान, 19.836 बीसीएम की क्षमता का 68 प्रतिशत बना हुआ है। पूर्वी क्षेत्र के 25 जलाशयों में जल स्तर बढ़कर 20.798 बीसीएम की क्षमता का 85 प्रतिशत, यानी 17.591 बीसीएम हो गया है, लेकिन बिहार और नागालैंड में जल स्तर क्रमशः सामान्य से 25 प्रतिशत और 13 प्रतिशत कम बना हुआ है।

पश्चिमी क्षेत्र में 50 जलाशयों में जल स्तर 37.357 बीसीएम की क्षमता का 95 प्रतिशत है, जिसमें गोवा का एकमात्र जलाशय पूरी तरह भरा हुआ है। महाराष्ट्र और गुजरात में जल स्तर क्रमशः सामान्य से 15 प्रतिशत और 27 प्रतिशत अधिक है। मध्य क्षेत्र में 26 जलाशयों का जल स्तर 48.227 बीसीएम की क्षमता का 91 प्रतिशत है, जिसमें उत्तर प्रदेश का भण्डारण सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक है।

दक्षिणी क्षेत्र के 43 जलाशयों में जल स्तर 54.634 बीसीएम की क्षमता का 85 प्रतिशत है। तेलंगाना और कर्नाटक में जल स्तर 90 प्रतिशत से अधिक है, जबकि केरल और आंध्र में यह 70 प्रतिशत से कम है। वर्तमान जल स्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से अधिक है, जो आगामी रबी सीजन के लिए सकारात्मक संकेत है, विशेषकर दक्षिणी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों के लिए।

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इस प्रकार, जल संग्रहण की स्थिति मौसमी आंकड़ों और भंडारण की गणनाओं के अनुसार मिश्रित रही है, लेकिन नेगेटिव रुझानों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में अच्छी स्थिति है, जो खेती और जल उपयोग के लिए शुभ संकेत हैं।


Complete News In English(पूरी खबर – अंग्रेज़ी में)

भारत के प्रमुख जलाशयों में जल संग्रहण की स्थिति: एक संक्षिप्त विश्लेषण

भारतीय जल संसाधनों की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के हालिया आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। भारत में 155 प्रमुख जलाशयों में इस सप्ताह जल स्तर में हल्की गिरावट आई है, हालांकि यह जल भण्डारण क्षमता के 87 प्रतिशत पर बना हुआ है। कुल मिलाकर, इन जलाशयों का जल स्तर 180.852 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) क्षमता का 156.639 बीसीएम है, जो पिछले सप्ताह के 157.159 बीसीएम से कम है।

जल सांख्यिकी का अवलोकन

कुल 40 जलाशय वर्तमान में पूरी तरह भरे हुए हैं, जबकि 13 जलाशय 50 प्रतिशत से कम भरे हुए हैं, जिसमें पिछले सप्ताह की तुलना में एक की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा जल संग्रहण में विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति को स्पष्ट करता है।

दक्षिणी क्षेत्र में जल स्तर में दो प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में जल संग्रहण में वृद्धि हुई है। मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में जल संग्रहण स्तर में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

मानसून का प्रभाव

जल संग्रहण में उत्तरदायी एक प्रमुख कारक दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी है, जिसका प्रभाव जलाशयों के स्तर पर देखने को मिल रहा है। अभी तक मानसून ने कुल 6 प्रतिशत अधिक वर्षा की है, जिसमें मध्य भारत में 17 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 16 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। हालाँकि, भारतीय मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में बारिश की भविष्यवाणी की है, जिससे पानी की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

क्षेत्र विशेष का विश्लेषण

उत्तर भारत में जल स्तर 19.836 बीसीएम क्षमता का 68 प्रतिशत है। यहाँ पंजाब (-65 प्रतिशत) और हिमाचल प्रदेश (-22 प्रतिशत) में जल संग्रहण सामान्य से कम है।

पूर्वी क्षेत्र में, 25 जलाशयों में जल स्तर 20.798 बीसीएम क्षमता का 85 प्रतिशत बढ़कर 17.591 बीसीएम हो गया है। फिर भी, बिहार में जल स्तर सामान्य से 25 प्रतिशत और नागालैंड में 13 प्रतिशत कम बना हुआ है।

पश्चिमी क्षेत्र में, 50 जलाशयों का जल स्तर 37.357 बीसीएम क्षमता का 95 प्रतिशत या 35.435 बीसीएम है। गोवा का एकमात्र जलाशय पूरी तरह भरा हुआ है, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में जल संग्रहण क्रमशः सामान्य से 15 प्रतिशत और 27 प्रतिशत अधिक है।

मध्य क्षेत्र में 26 जलाशयों का जल स्तर 48.227 बीसीएम क्षमता का 91 प्रतिशत, अर्थात 43.691 बीसीएम है। यहाँ उत्तर प्रदेश में जल संग्रहण सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक है, जो पिछले साल की तुलना में एक शुभ संकेत है।

दक्षिणी क्षेत्र में 43 जलाशयों का जल स्तर 54.634 बीसीएम का 85 प्रतिशत या 46.406 बीसीएम है। तेलंगाना और कर्नाटक में जल संग्रहण स्तर 90 प्रतिशत से अधिक है, जबकि केरल और आंध्र प्रदेश में यह 70 प्रतिशत से कम है।

भविष्य की संभावनाएँ

वर्तमान जल स्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से अधिक है, जो आने वाले रबी सीजन के लिए विशेष रूप से दक्षिणी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में सकारात्मक है। शनिवार, 26 सितंबर 2024 को प्रदर्शित आँकड़े सुझाव देते हैं कि समग्र जल संग्रहण स्थिति अभी भी स्थिर है और मानसून की बारिश से स्थिति और सुधारने की संभावना है।

समग्र रूप से, सीडब्ल्यूसी के आंकड़े न केवल वर्तमान जल स्तर की तस्वीर पेश करते हैं, बल्कि आने वाले फसल सत्र के लिए भी संकेत देते हैं। जलाशयों का इन स्तरों पर रहना रबी फसल की बुवाई के लिए एक शुभ संकेत है, जो भारतीय कृषि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।



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